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Blog posts May 2013

Why I did not settle in USA ???

कम्प्यूटर इंजीनियर  अमेरिका प्रयाण कथा को पढ़ने के बाद कुछ मित्रों ने मुझ से पूछा कि आप तो 1992 में ही अमेरिका घूम आए थे फ़िर वहां बसे क्योँ नहीं ? पेश हैं वे कारण जिनकी वज़ह से मैं अमेरिका में नहीं बसा  ..

 

अमेरिका मुझे क्यों पसंद नहीं है ? 

 

एक कारण हो तो बताऊं कि मुझे अमेरिका क्यों पसंद नहीं। सबसे बड़ा कारण तो यह है कि वहां थूकने की स्वाधीनता बिलकुल नहीं है। मुझे आश्चर्य है, वह कैसा प्रजातांत्रिक देश है। हमारे यहां पान-गुटका-तंबाकू खाने वाले तो यत्र तत्र थूकते ही हैं, परस्पर मतभेद रखने वालों के लिए भी थूकना अभिव्यक्ति का कितना शक्तिशाली माध्यम है। थूक लेने के बाद मन को कितनी शांति मिलती है, व्यक्ति स्वस्थ हो जाता है। सभी रा…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 17

अमेरिका प्रयाण कथा अंतिम अध्याय ( 17 ) 

स सीरिअल से नौ दो ग्यारह होने का वक्त आ गया है पर उस से पहले अमेरिका में  नौ सौ ग्यारह की महिमा जानना अनिवार्य है। 

 नौ सौ ग्यारह की महिमा अमेरिका मे अनंत है। बड़े काम का नंबर है। दमकल, ऐंबुलेंस या फिर पुलिस को बुलाने के लिए नौ सौ ग्यारह नंबर घुमाया नहीं कि मिनट भर में पुलिस की गाड़ी दरवाज़े पर होती है। एक बार तो किसी नये रंगरूट को कंपनी से मिली निर्देशपुस्तिका में लिख दिया गया था कि आपातकाल में यह नंबर मिलाओ। भाई ने हवाईअड्डे पर कंपनी की भेजी टैक्सी न पाकर हड़बड़ाहट में नौ सौ ग्यारह घुमा दिया। फिर तो लालनीली बत्ती वाली टैक्सी के ड्राइवर यानि कि पुलिसवाले ने जो लेक्चर पिलाया कि पूछिए मत।…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 16

भयो प्रगट कृपाला 

 

 

अमेरिका में प्रसव की तैयारी बहुत ही विधिवत ढंग से होती है। बकायदा अस्तपताल में निशुल्क कक्षाएं लगती हैं, शिशुपालन की भी और प्रसव कैसे होता है उसकी भी। कुछ दिन पहले अस्पताल में एक टूर भी कराया जाता है जिसमें यह बता दिया जाता है कि प्रसव वाले दिन किस रास्ते से आना है, मैटरनिटी वार्ड के लिए अलग लिफ्ट और अलग रास्ते की व्यवस्था होती है। यहां प्रसव में पति को उपस्थित रहने का विकल्प भी होता है और अगर शल्य चिकित्सा हो रही हो तो वह देखने का भी।…

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Critical Assessment of Astrology -9

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश - 9 )

 

ज्योतिष सिर्फ नक्षत्रों का अध्ययन नहीं है। वह तो है ही! तो वह तो हम बात करेंगे। साथ ही ज्योतिष और अलग-अलग आयामों से मनुष्य के भविष्य को टटोलने की चेष्टा है कि वह भविष्य कैसे पकड़ा जा सके। उसे पकड़ने के लिए अतीत को पकड़ना जरूरी है। उसे पकड़ने के लिए अतीत के जो चिह्न आपके शरीर पर और आप के मन पर छूट गए हैं, उन्हें पहचानना जरूरी है।

आपके शरीर पर भी चिह्न हैं, आपके मन पर भी चिह्न ह…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 15

 अमेरिका वापसी और हमारे परिवार का अंतर्राष्ट्रीयकरण  

 

 भारत से  वापसी हुई तो डलास से भी रुख़सत होने का समय आ चुका था। अगला कार्यक्षेत्र मिला फ़िलाडेल्फ़िया। अभी तक कुल मिलाकर अमेरिका के दक्षिणी प्रांतो में ही रहना बसना हुआ था। उत्तर पूर्व के प्रांतो को लेकर एक अज्ञात सा डर बैठा रहता था। दरअसल यह सारा डर बर्फ़ को लेकर महेश भाई और सत्यनारायण स्वामी सरीखे मित्रों ने पैदा किया था। वैसे यह डर बेबुनियाद भी नहीं था। सत्यनारायण अपने बर्फ़ पर कार फिसलने से हुई दुर्घटना और बर्फ़ीले मौसम की मुश्किलों के हाल बता चुके थे। इस बार लेकिन कोई विकल्प नहीं था। दिसंबर का मौसम था और डलास से फ़िलाडेल्फ़िया, सौलह सौ मील लंबा ड्राइव करना संभव नहीं था। इसलिए हवाई यात्रा करते हुए फ़िलाडेल्फ़िया का रुख़ किया। फ़िलाडेल्फ़िया में एक छोटे से उपशहर, जिसे हम यहां सबर्ब कहते हैं, में काम करना और रहना था। जगह का नाम सुन कर विचित्र लगा 'किंग आफ प्रशिया'। हवाई अड्डे पर किसी कर्मचारी से पूछा भी कि यह किंग आफ प्रशिया का नाम किस किंग पर पड़ा…

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Critical Assessment of Astrology -8

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश - 8 )

 

ज्योतिष कहता यही है कि इस जगत में जो भी घटित होता है उसके कारण हैं। हमें ज्ञात न हों, यह हो सकता है। ज्योतिष यह कहता है कि भविष्य जो भी होगा वह अतीत से विच्छिन्न नहीं हो सकता, उससे जुड़ा हुआ होगा। आप कल जो भी होंगे वह आज का ही जोड़ होगा। आज तक आप जो हैं वह बीते हुए कल का जोड़ है। ज्योतिष बहुत वैज्ञानिक चिंतन है। वह यह कहता है कि भविष्य अतीत से ही निकलेगा। आपका आज कल से निकला है, आपका आने वाला कल आज से निकलेगा। और ज्योतिष यह भी कहता है कि जो कल होने वाला है वह किसी सूक्ष्म अर्थों में आज भी हो जाना चाहिए।…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 14

पागल कौन?


एक रात में मेरे चाचाश्री का फ़ोन आया। वे मिर्ज़ापुर के पास किसी फैक्ट्री में सहायक जनरल मैनेजर हैं। चाचाश्री कानपुर न आ पाने का कारण बता रहे थे। कारण सुन कर सब हंस–हंस कर दोहरे हो गए।

चाचाश्री की फैक्ट्री में कोई गार्ड था संतराम। किसी मानसिक परेशानी के चलते उसका दिमाग़ फिर गया और वह फैक्ट्री में तोड़फोड़ करने लगा। चाचाश्री ने संतराम को दो चौकीदारों के साथ फैक्ट्री के डाक्टर का सिफ़ारशी पत्र देकर रांची मानसिक चिकित्सालय ले जाकर भर्ती कराने का आदेश दिया। चाचाश्री ने दोनों को निर्देश दिया था कि रांची पहुंच कर वहां के डाक्टर से बात करवा दें।…

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Critical Assessment of Astrology -7

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश - 7 )

 हजारों-लाखों पक्षी हर साल यात्रा करते हैं हजारों मील की। सर्दियां आने वाली हैं, बर्फ पड़ेगी, तो बर्फ के इलाके से पक्षी उड़ना शुरू हो जाएंगे। हजारों मील दूर किसी दूसरी जगह वे पड़ाव डालेंगे। वहां तक पहुंचने में अभी उन्हें दो महीने लगेंगे, महीना भर लगेगा। अभी बर्फ गिरनी शुरू नहीं हुई, महीने भर बाद गिरेगी। ये पक्षी कैसे हिसाब लगाते हैं कि अब महीने भर बाद बर्फ गिरेगी? क्योंकि अभी हमारी मौसम को बताने वाली जो वेधशालाएं हैं वे भी पक्की खबर नहीं दे पाती हैं। मैंने तो सुना है कि कुछ मौसम की खबर देने वाले लोग पहले ज्योतिषियों से पूछ जाते हैं सड़कों पर बैठे हुए कि आज क्या खयाल है--पानी गिरेगा कि नहीं?…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 13

 

  

अरोड़ा जी अपने इन्जीनियरिंग कालेज़ ( HBTI ,Kanpur ) में

 

एक दिन सोचा कि अपने इंजीनियरिंग कालेज के दर्शन ही कर लिए जाएं। थोड़ी ही देर में एचबीटीआई के निदेशक के केबिन के बाहर था। उन दिनों डा .वी के जैन निदेशक थे। केबिन के बाहर उनके सचिव और एक दो क्लर्क बैठे थे। डा . जैन के बारे में पूछते ही रटा रटाया जवाब मिला 'डायरेक्टर साहब अभी ज़रूरी मीटिंग कर रहे हैं, दो घंटे के बाद आइए।' पता नही इन क्लर्कों की आदत होती है या इन्हें निर्देश होतें है कि हर ऐरे गैरे को घुसने से रोकने के लिए मीटिंग का डंडा इस्तेमाल किया जाए। सचिव ने पूछ लिया 'कहां से आए हैं, मैंने जब डलास कहा तो उसने मुझे अंदर जाने का इशारा कर दिया। मतलब कि मीटिंग के दौरान नोएंट्री का बोर्ड सिर्फ़ स्वदेशियों के लिए ही होता है। …

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Critical Assessment of Astrology -6

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश - 6 )

 

प्रोफेसर ब्राउन ने एक अध्ययन किया है। वह खुद ज्योतिष में विश्वासी आदमी नहीं थे; अविश्वासी थे; और अपने पिछले लेखों में उन्होंने बहुत मजाक उड़ाई है। लेकिन पीछे उन्होंने सिर्फ खोजबीन के लिए एक काम शुरू किया, कि मिलिट्री के बड़े-बड़े जनरल्स की उन्होंने जन्मकुंडलियां इकट्ठी कीं--डाक्टर्स की, अलग-अलग प्रोफेशंस की। बड़ी मुश्किल में पड़ गए इकट्ठी करके। क्योंकि पाया कि प्रत्येक प्रोफेशन के आदमी एक विशेष ग्रह में पैदा होते हैं, एक विशेष नक्षत्र-स्थिति में पैदा होते हैं।…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 12

कनपुरियोँ से अरोड़ा जी की भिड़न्त 

 

दो दिन बाद बैंक गया। सबेरे नौ बजे बैंक तो खुल गया था पर झाडू लग रही थी, सारे कर्मचारी नदारद। एक अदद चपरासी मौजूद था जिसने सलाह दी कि दस ग्यारह बजे आइए। यहां सब आराम से आते हैं। अब तक स्मृति के बंद किवाड़ खुलने लगे थे और जेटलैग तो क्या सांस्कृतिक लैग, व्यावहारिक लैग सब काफूर हो चले थे। दो घंटे के बाद वापस लौटा तो पूरे अस्सी आदमी लाइन में लगे थे। मैं भी लग गया। …

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Critical Assessment of Astrology -5

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश - 5 )

हम सबकी चमड़ियां अलग-अलग हैं, इंडिविजुअल हैं। अगर मेरा हाथ टूट जाए और मेरी चमड़ी बदलनी पड़े तो आपकी चमड़ी मेरे हाथ के काम नहीं आएगी। मेरे ही शरीर की चमड़ी उखाड़ कर लगानी पड़ेगी। इस पूरी जमीन पर कोई आदमी नहीं खोजा जा सकता जिसकी चमड़ी मेरे काम आ जाए।

क्या बात है? फिजियोलाजिस्ट से हम पूछें कि दोनों की चमड़ी की बनावट में कोई भेद है? चमड़ी के रसायन में कोई भेद है? चमड?ी में जो तत्व निर्मित करते हैं चमड़ी को, उसमें कोई भेद है?…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 11

अरोड़ा जी  NRI बनकर कानपुर छुट्टी पर लौटे..

 

 


 

डेढ़ साल बाद भारत भ्रमण पर जाने का अवसर मिला। डलास में पहले श्रीमती जी और चारूलता पूरे तीन महीने की छुट्टी पर निकल गईं। मुझे बाद में तीन हफ्ते के लिए जाना था। डलास से ब्रसेल्स और ज्युरिख होते हुए दिल्ली पहुंचना था। आमतौर पर यूरोप में फ्लाईट सवेरे के समय पहुंचती है और पूरा यूरोप हरियाली होने की वजह से गोल्फ के मैदान सरीखा दिखता है। भारत आते–आते रात हो गई थी। पर इस्लामाबाद के ऊपर से उड़ते हुए पूरा समय आंखों में ही बीत गया, दिल्ली का आसमान ढूंढ़ते–ढूंढ़ते। रात एक बजे प्लेन ने दिल्ली की ज़मीन छुई तो प्लेन के अंदर सारे बच्चों ने करतल ध्वनि की। प्लेन में मौजूद विदेशी हमारा देशप्रेम देखकर अभिभूत थे, साथ ही यह देखकर भी कि किस तरह हम सब प्लेन से टर्मिनल पर आते ही अपनी भारत मां की धरती को मत्थे से लगाकर खुश हो रहे थे। कुछेक लोग जो वर्षों बाद लौटे थे, हर्षातिरेक में धरती पर दंडवत लोट गए।…

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Critical Assessment of Astrology -4

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश -4)

 ब्राउन एक दूसरे शास्त्र का अन्वेषक है। और उस शास्त्र को अभी ठीक-ठीक नाम मिलना शुरू हो रहा है। लेकिन अभी उसे कहते हैं प्लेनेटरी हेरिडिटी, उपग्रही वंशानुक्रम। अंग्रेजी में शब्द है, होरोस्कोप। वह यूनानी होरोस्कोपस का रूप है। होरोस्कोपस, यूनानी शब्द का अर्थ होता है: मैं देखता हूं जन्मते हुए ग्रह को। शब्द का अर्थ होता है।

असल में जब एक बच्चा पैदा होता है तब उसी समय पृथ्वी क…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 10

 अमेरिकन स्वतंत्रता दिवस की मस्ती

 

 

अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस 4 जुलाई को मनाया जाता है। स्वतंत्रता दिवस पर याद आती हैं 'सारे जहां से अच्छा' की स्वर लहरियां, रंग बिरंगी झंडियां, स्कूल में बंटने वाले बूंदी के लड्डू, टीवी पर यह गिनना कि राजीव गांधी ने कितनी बार 'हम देख रहे हैं' या 'हम देखेंगे' कहा। यहां माजरा कुछ दूसरा दिखता है। जगह–जगह स्टार और स्ट्राइप्स यानि अमेरिकी झंडा तो दिखता है, पर वह तो वैसे भी साल भर हर कहीं दिख सकता है। पूरी आज़ादी है आपको अमेरिकी झंडा लगाने की और तो और लोग स्टार और स्ट्राइप्स वाली टी शर्ट और बनियान तक पहन डालते हैं। चारों ओर सेल के नज़ारे। हां, शाम को तकरीबन हर शहर में संगीत समारोह, खाना–पीना और धुआंधार आतिशबाज़ी ज़रूर होती है।…

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Critical Assessment of Astrology -3

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश -3)

   

इस संबंध में--पैरासेलीसस को हुए तो कोई पांच सौ वर्ष होते हैं, उसकी बात भी खो गई थी--लेकिन अब पिछले बीस वर्षों में, उन्नीस सौ पचास के बाद दुनिया में ज्योतिष का पुनर्आविर्भाव हुआ है। और आपको जान कर हैरानी होगी कि कुछ नये विज्ञान पैदा हुए हैं जिनके संबंध में कुछ आपसे कह दूं तो फिर पुराने विज्ञान को समझना आसान हो जाएगा। उन्नीस सौ पचास में एक नयी साइंस का जन्म हुआ। उस साइंस का नाम है कास्मिक केमिस्ट्री, ब्रह्म-रसायन। उसको जन्म देने वाला आदमी है, जियॉजारजी जिऑरडी। यह आदमी इस सदी के कीमती से कीमती थोड़े से आदमियों में एक है। इस आदमी ने वैज्ञानिक आधारों पर प्रयोगशालाओं में अनंत प्रयोगों को करके यह सिद्ध किया है कि जगत, पूरा जगत, एक आर्गेनिक यूनिटी है। पूरा जगत एक शरीर है।…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 9

पापड़ और जलेबी 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

होटल में तीन दिन रुकने के बाद हम नए अपार्टमेंट में गए।। सामान पहुंचाते–पहुंचाते रात के एक बज गए। अपार्टमेंट में पार्किंग आरक्षित थी। मेरे पार्किंग लॉट में न जाने किस खबीस के बच्चे ने अपनी कार खड़ी कर रखी थी। मैने कुछ देर के लिए एक आरक्षित किंतु खाली पार्किंग लॉट हथिया लिया। अपार्टमेंट में समान रख कर वापस जा रहा था कि एक वृद्ध सज्जन अवतरित हुए। सीधे सवाल दागा कि क्या यह करोला तुम्हारी है। मैने बड़ी जल्दबाज़ी में लापरवाही से जवाब दिया कि मेरे पार्किंग लॉट में किसी ने हथिया रखा है अतः मैने दूसरे पार्किंग लॉट का प्रयोग कर लिया। वृद्ध सज्जन का अगला बाउंसर था, आपका पार्किंग लॉट हथिया लिया गया हो तो इसका यह मतलब नहीं कि आप भी किसी का पार्किंग लॉट हथिया लें। आप गेस्ट लॉट का प्रयोग कर सकते थे। जवाब बिलकुल वाजिब था। चांदनी रात में हैलोजेन की दूधिया रौशनी में भी मैं वृद्ध सज्जन के तमतमाए चेहरे की लाली देख सकता था। मैने सफाई दी कि जनाब कुछ देर के लिए सामान उतारने तक आपका लॉट प्रयोग किया था, मैं अभी ख़ाली करता हूं। लेक…

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Critical Assessment of Astrology -2

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश -2)

 


सूरज, जैसा हम साधारणतः सोचते हैं, ऐसा कोई निष्क्रिय अग्नि का गोला नहीं है, अत्यंत सक्रिय है। और प्रतिपल सूरज की तरंगों में रूपांतरण होते रहते हैं। और सूरज की तरंगों का जरा सा रूपांतरण भी पृथ्वी के प्राणों को कंपित करता है। इस पृथ्वी पर कुछ भी ऐसा घटित नहीं होता जो सूरज पर घटित हुए बिना घटित हो जाता हो। जब सूर्य का ग्रहण होता है तो पक्षी जंगलों में गीत गाना चौबीस घंटे पहले से बंद कर देते हैं। पूरे ग्रहण के समय तो सारी पृथ्वी मौन हो जाती है, पक्षी गीत गाना बंद कर देते हैं, सारे जंगलों के जानवर भयभीत हो जाते हैं, किसी बड़ी आशंका से पीड़ित हो जाते हैं। बंदर वृक्षों को छोड़ कर नीचे आ जाते हैं। भीड़ लगा कर किसी सुरक्षा का उपाय करने लगते हैं। और एक आश्चर्य कि बंदर, जो निरंतर बातचीत और शोरगुल में लगे रहते हैं, सूर्यग्रहण के वक्त बंदर इतने मौन हो जाते हैं जितने साधु और संन्यासी भी नहीं होते!…

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Memoirs of A Computer Engineer on H-B1 Visa to US -Part 8

 

तबादला डलास के लिए  

 

एक दिन सुबह प्रोजेक्ट मैनेजर ने कमरे में बुलाकर मेरा प्रोजेक्ट समाप्त होने की सूचना दी। सीधी साधी भाषा में मतलब यह था कि उन्हें अब मेरी ज़रूरत नहीं थी। और अगले हफ्ते से मैं बेंचप्रेस के लिए तैयार हो गया। जैसा कि पहले भी बता चुका हूं कि तेज़ी से बदलती तकनीक वाले इस कंप्यूटर क्षेत्र में प्रवेश तो आसान है पर हर दो चार महीने के बाद एक प्रोजेक्ट से दूसरे प्रोजेक्ट पर जाने का मतलब कई बार एक राज्य से दूसरे राज्य में जाना होता है। इन सबके साथ जुड़ी है स्थानांतर की चिर समस्या। यानि कि नए प्रांत में नया रहने का ठिकाना, सामान और कार का स्थानांतरण फिर घर का पता, टेलीफोन, बैंक इत्यादि सेवाओं को नए स्थान परिवर्तन से सूचित कराने की जद्दोजहद। ख़ैर बेंच पर आने का पहला सोमवार था। मार्च की गुनगुनी धूप सनरूम में आ रही थी और मैं नया कुछ तकनीकी मसला पढ़ रहा था कि तभी टेलीफोन की घंटी बजी। यह मामू का फोन था। मामू शब्द कंप्यूटर प्रोगरामों ने बिचौलियों के लिए ईजाद कर रखा है। पता चला कि दो घंटे में कोई जनाब इंटरव्यू के लिए फोन करेंगे। फोन आया और सिर्फ यह पू…

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Critical Assessment of Astrology -1

ज्योतिष कितना सच और कितना झूठ (ओशो रजनीश -1)

 

हम में से अनेक लोग अपना काफ़ी समय ज्योतिष के सही या गलत होने की सतही बहस पर गुज़ार देते हैं , पर कभी उसकी गहराई में जाने की कोशिश नहीं करते हैं । इस धारावहिक की हरेक कड़ी में समाज के प्रबुद्ध व्यक्तियों की ज्योतिष के बारे में राय प्रस्तुत की जा रही है । पहली कड़ी में ओशो रजनीश के विचार जानिए ज्योतिष पर ...

  

ज्योतिष शायद सबसे पुराना विषय है और एक अर्थ में सबसे ज्यादा तिरस्कृत विषय भी है। सबसे पुराना …

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