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Use Behavioural Astrology

Understanding a Good or Bad Turn in Destiny

March 4, 2013

पिछले लेख में मैंने देश , काल व पात्र की विस्तार से चर्चा की थी . अब मैं आपको कुछ कसौटियां दूंगा जिन्हें आप प्रयोग करके यह जान सकेंगे कि स्थान परिवर्तन से हमारी तकदीर में सुखद परिवर्तन होगा या दुखद .

ज्योतिष के अनुसार , यदि आप अपने वर्तमान स्थान पर पहले से ही सुख शान्ति पूर्वक रह रहे हैं और बिना आपके प्रयास से , स्वत: स्थान परिवर्तन का योग, सरल , सहज व स्वाभाविक रूप से बनता है तो ऐसा स्थान परिवर्तन आपको और तरक्की देगा और उसे स्वीकार कर लेना चाहिए . इसका एक और तर्क भी है. कई बार वर्तमान स्थान जो आपके लिए अभी तक अच्छा रहा है , उसके अशांत होने का समय आ चुका होता है और समय आपको उस से बचाने के लिए स्थान परिवर्तन का योग बनाता है. ऐसे योग को अस्वीकार करने के बाद , आपको वर्तमान स्थान दिनो दिन पीड़ादायक लगने लगेगा .

सहज स्थान परिवर्तन का योग अगर बहुत समय तक दुर्भाग्य से परेशान रहने के बाद बने तो ऐसा योग अवश्य ही सुख शांतिकारक होता है.

अगर आप एक ही स्थान पर कई वर्ष सुख शान्ति से रहे हैं ,और फिर कुछ महीने में ही आपकी शान्ति भंग हो चुकने के बाद, गंदे तरीके से स्थान परिवर्तन ( धमकी या षड्यंत्र द्वारा ) का योग बनना ,आपके दुर्भाग्य आरम्भ होने का सूचक है. लेकिन फिर भी स्थान परिवर्तन स्वीकार कर लेना उचित है क्योँकि न करना दुर्भाग्य को और प्रबल कर देगा . स्थान परिवर्तन के कर्म द्वारा दुर्भाग्य का एक अंश समाप्त हो जाता है और उसका दबाव नहीं रहता है.

कई बार स्थान परिवर्तन परिवार में नए सदस्य के आगमन ( शिशु जन्म या विवाह ) या पुराने सदस्य के विदा होने ( मृत्यु, विवाह ,तलाक ,बंटवारा आदि ) के कारण भी होता है और इनका सुखद या दुखद होना इनके कारण के अनुसार होता है.

अब हम तकदीर के बदलने के तीसरे कारण पात्र या व्यक्ति के बारे में चर्चा करेंगे .

 

3. व्यक्तियोँ द्वारा परिवर्तन

तकदीर बदलने का तीसरा और आख़िरी तरीका सजीव व्यक्तियोँ की संगति द्वारा है. अच्छी तकदीर वाले व्यक्ति या उनके द्वारा चलाए जाने वाले संस्थान से जुड़ने से आपकी तकदीर अच्छी हो सकती है और इसका उलटा भी सही है. जैसे चुम्बकीय लोहे के साथ रहने से चुम्बक का कुछ प्रभाव सादे लोहे में आ जाता है , उसी तरह भाग्यशाली व्यक्ति या संस्था के साथ जुड़ने से आप भाग्यशाली व दुर्भाग्यग्रस्त व्यक्ति व उनकी संस्था के साथ जुड़ने से आप दुर्भाग्यग्रस्त हो सकते हैं . विजय माल्या की दुर्भाग्यग्रस्त कम्पनी किंगफिशर एयरलाइन से जो भी जुड़ेगा उसकी दिक्कतें बढनी तय हैं .

लेकिन यह पूरी तरह से आपके हाथ में नहीं है . कारण यह है कि प्रकृति के नियमों के तहत, भाग्यशाली व्यक्ति के साथ समुचित भाग्यशाली व्यक्ति ही लम्बे समय के लिए ,साथ जुड़ सकता है. इसी तरह दुर्भाग्यग्रस्त व्यक्ति , दुर्भाग्यग्रस्त व्यक्ति या संस्था से जुड़ता है.

सजीव व्यक्ति से मिलना या बिछुड़ना सदैव अपने हाथ में नहीं होता है . शादी, तलाक , व्यवसाय , जन्म , मृत्यु आदि विभिन्न ऐसे कारण हैं जो आपके नियंत्रण में नहीं होते हैं ,पर जिनके कारण आप सजीव व्यक्तियोँ से मिलते , बिछुड़ते रहते हैं , और इन की वजह से आपकी तकदीर में परिवर्तन आते रहते हैं .

स्थान परिवर्तन से सुखद या दुखद परिवर्तन जिस तरह से घटित होते हैं , उसी तरह व्यक्ति परिवर्तन भी सुख या दुःख लाते हैं . कोई नया व्यक्ति, आप से किस प्रकार और किन हालात में जुडा और उससे पहली बार मिलने के बाद आपका मन प्रसन्न हुआ या दुखी , इससे यह तय होता है कि व्यक्ति या संस्था आपके लिए सुखद रहेगा या दुखद . इसमें मुख्य भूमिका विचारोँ के मिलने की होती है पर बिना विचार सम्प्रेषण के भी यह तय हो सकता है जैसे नवजात शिशु के आगमन पर होता है.

अगर आप को किसी संस्था में नौकरी या व्यावसायिक अवसर सहज रूप में , बिना किसी व्यवधान के मिला है, तो वह आपके लिए सुखद और अगर बहुत देरी व कष्ट व व्यवधान के बाद मिला है , तो वह आंतरिक रूप से आपके लिए दुखद ही रहेगा . यही बात बच्चे के जन्म के साथ , शादी- विवाह , स्कूल -कालेज के प्रवेश , रोग और मुकदमें में डाक्टर या वकील ढूढने पर भी लागू होती है .

ऊपर मैंने लिखा है कि समय , देश व पात्र को भी प्रभावित करता है . अच्छे समय के वक्त आपको अच्छा स्थान व अच्छे संपर्क मिल जाते हैं और खराब समय में आप को खराब स्थान व व्यक्ति मिल जाते हैं . मेरा अनुभव यह है कि, जब हम अच्छे समय से बुरे समय में प्रवेश करने लगते हैं , उस वक्त मिलने वाले स्थान व व्यक्ति खराब होते हैं , और जब हमारा वक्त अच्छा आने वाला होता है , तब अच्छे स्थान व अच्छे व्यक्ति अपने आप मिलने लगते हैं .

अक्सर लोग वास्तु शास्त्र द्वारा तकदीर बदलने की बात करते हैं . वास्तविकता यही है कि अच्छे वक्त में आप को जो शहर या मकान मिलता है , वह अच्छा ही होता है और वास्तु की कसौटी पर भी सही होता है . लेकिन अगर आप का वक्त सही नहीं है , तो या तो आप मजबूरी में गलत वास्तु के मकान में रहने लगते हैं या आप किसी कारण से सही वास्तु के मकान में टिक ही नहीं पाते हैं .

तकदीर का ऊँट किस करवट बैठेगा , यह आप अपने शरीर लक्षणों से भी ज्ञात कर सकते हैं . जिस जगह पहुँच कर आप का रहना , खाना , सोना सब हराम हो जाए , वह जगह देखने में या अन्य लोगों की नज़र में कितनी ही अच्छी हो , वह आप के लिए लम्बी अवधि में हानिकर ही होगी . और अगर इसका उलटा हो जाए, तो वह जगह सुखदायक होगी .

यही कसौटी व्यक्ति के साथ भी लागू होती है. अगर किसी नए व्यक्ति के साथ जुड़ने के बाद आपकी चिंता - फिक्र बढ़ जाती है , खाना , सोना अस्त व्यस्त हो जाता है , तो यह व्यक्ति लम्बी अवधि में आपके लिए दुर्भाग्यकारक ही होगा . हो सकता कि वह व्यक्ति ऊंचे पद पर होने से आपको कुछ प्रत्यक्ष लाभ देता दिखे , लेकिन वह आपको स्थायी रूप से रोगग्रस्त करके, आपको कुल मिलाकर हानि ही देगा .

अनुभव के आधार पर मैंने तकदीर में बदलाव के जो तरीके पाए , वह मैंने आपके साथ बांटे हैं . असल में , कुंडली द्वारा ज्योतिषी गणना कर के दो तीन विकल्पों पर पहुंचता है और उस समय उनमें से एक विकल्प चुनने में देश , काल और पात्र की तकदीर बदलने वाली कसौटियां काम आती हैं . जो ज्योतिषी इन कसौटियों को नहीं जानते हैं या गणना के बाद इन्हें इस्तेमाल नहीं करते हैं , उनकी भविष्यवाणियाँ अक्सर गलत हो जाती हैं . सही कुंडली से गणना व देश ,काल व पात्र की कसौटी पर कसी भविष्यवाणी अचूक ही होती हैं .

( आप अपनी प्रतिक्रया से अवश्य अवगत कराएं )

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