Menu

Use Behavioural Astrology

Obama , Saturn Transit & People's Rule

February 8, 2014

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ..

 

सन 2007 से 2009  तक शनि सूर्य की राशि सिंह में था . सूर्य और शनि नॉर्थ और साउथ पोल जितने अलग माने जाते हैं . एक उजाले (गोरे) , गर्मी ,सत्ता और पराक्रम का स्थिर प्रतीक तो दूसरा अँधेरे ( कालेपन) , बियाबान सौर सीमा की सुदूर परिधि पर एक चौकीदार की तरह 140 करोड़ किमी की रेडियस पर अथक परिक्रमा करने वाला , प्रजा ,श्रम व सत्ताहीनता का प्रतीक ठंडा ग्रह .

लेकिन सन 2007   में सितम्बर 2009  तक के लिए, ऐसा ही शनि , सूर्य की अपनी  इकलौती राजमहल जैसी राशि सिंह में प्रवेश कर गया था , जो 30 साल में एक  ही बार होता है . यह समय शनि के राजा बनने , जनक्रान्ति होने का होता है .

अगर आप को  विश्वास नहीं आता तो 30 साल पहले 1977  में हुई  कांग्रेस और इंदिरा गांधी की हार याद कीजिए  जिसे जयप्रकाश नारायण जी ने दूसरी आज़ादी  हा था और उससे भी 30 साल पहले  देश की आज़ादी  के बारे में सोचिए .

यदि ऐसे समय में  विश्व में सूर्य की तरह  चमकने वाले अमेरिका में चुनाव हो जाएं तो क्या होगा ? ऐसा योग पहली बार बना था और व्हाईट हाउस पर एक शनि का कब्जा हो गया .

 " अमरीकी राजनीति के आसमान में अचानक से एक सितारा चमकने लगा. चमक ऐसी कि कैलिफ़ोर्निया से क़ाहिरा तक, बॉस्टन से बीजिंग तक, ड्रॉइंग रूम और लियों में, गांवों और शहरों में, संसद और कारख़ानों में लोग उसकी बातें करने लगे. नाम था ओबामा. लेकिन वो नाम कुछ भी हो सकता था- उम्मीद, भरोसा, सिद्धांत, ईमान और शायद सत्य भी. राजनीति में ये शब्द मायने भी रख सकते हैं. वो एहसास ही कुछ अलग सा था.

वो कहानियां सुनाता था, लहरों के ख़िलाफ़ तैरने की बात करता था. चेहरे पर चमक थी, हेमलिन शहर के बांसुरीवादक की तरह हज़ारों की भीड़ को अपने पीछे खींचता और मंत्रमुग्ध लोग तैयार रहते उसके साथ कहीं भी जाने को. लड़कियां उसे सेक्सी कहती थीं, बुद्धिजीवी उसे दूरदर्शी कहते थे, बच्चे अचानक से सुपरमैन और स्पाइडरमैन को छोड़कर ओबामा बनना चाहते थे. अमरीका ने जॉन एफ़ कैनेडी को देखा था, बिल क्लिंटन को देखा था लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं देखा था. 

20 जनवरी 2009 को वाशिंगटन की एक कंपकपाती सर्द सुबह नेशनल मॉल पर हज़ारों की भीड़ में मैं भी गवाह था उन पलों का जब उस बांसुरीवादक ने वादा किया अमरीका से और दुनिया से एक नई शुरूआत का, एक नई यात्रा का. " (from BBC Hindi)

  फिर 2011 से 2014  तक शनि तुला राशि में . प्रजा और प्रजातंत्र का मौलिक ग्रह यदि  अपनी उच्च राशि में आ जाए तो क्या होना चाहिए ? विश्व भर में वास्तविक प्रजातंत्र की मांग ने जोर पकड़ लिया , बड़े बड़े राजा धूल  चाट गए , अकड़ू नेता प्रजाभक्त होने लगे . 2012 में ओबामा फिर चुनाव जीत गए और 2013 में दिल्ली पर केजरीवाल ने कब्जा जमा लिया .

 ऐसे समय में जनता की भावनाएं निम्न प्रकार व्यक्त होती हैं ..

सदियो की ठण्डी बुझी राख सुगबुगा उठी,

मिट्टी सोने का ताज् पहन इठलाती है।

दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है ...........


जनता? हां, मिट्टी की अबोध् मूर्ती वही,

जाड़े पाले की कसक सदा सहने वाली,

जब अंग-अंग मे लगे सांप हो चूस रहे,

तब भी न कभी मुंह खोल दर्द कहने वाली।

लेकिन, होता भूडोल, बवंडर उठते है,

जनता जब कोपकुल हो भृकुटी चढ़ाती है,

दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,

सिंहासन खाली करो कि जनता आती है।


हुन्कारो से महलो की नीव उखड जाती,

सांसो के बल से ताज हवा मे उडता है,

जनता की रोके राह समय मे ताब कहां?

वह जिधर चाहती, काल उधर ही मुडता है।


सबसे विराट जनतंत्र जगत का आ पहुंचा,

120 कोटि हित सिहासन तैयार करो,

अभिषेक आज राजा का नहीं, प्रजा का है,

120 कोटि जनता के सिर पर मुकुट धरो।

 

आरती लिये तु किसे ढूंढता है मूरख,

मन्दिरो, राजप्रासदो मे, तहखानो मे,

देवता कही सड़कों पर मिट्टी तोड रहे,

देवता मिलेंगे खेतो मे खलिहानो मे।

 

फ़ावडे और हल राजदण्ड बनने को है,

धुसरता सोने से श्रृंगार सजाती है,

दो राह, समय के रथ का घर्घर नाद सुनो,

सिहासन खाली करो कि जनता आती है।

( रामधारी सिंह 'दिनकर ')

लेकिन हर सुखद कथा का अंत होता है  .  

 " अचानक से यू-ट्यूब पर पांच साल पुराने ओबामा दिखे. किसी मनपसंद पुरानी फ़िल्म की तरह  . मैंने उनके कुछ भाषणों को सुना और लगा जैसे हॉलीवुड के किसी कैरेक्टर को देख रहा हूं जो ओबामा की भूमिका निभा रहा है. 

जो ओबामा इन दिनों मुझे दिखते हैं वो तो पुराने ओबामा की दीवार पर टंगी पीली पड़ती हुई ब्लैक ऐंड व्हाइट तस्वीर की तरह नज़र आते हैं. बालों में सफ़ेदी आ गई है, चेहरे की चमक गायब है, भाषण उबाऊ हो रहे हैं, ओबामा हमेशा थके-थके नज़र आते हैं.

उनकी लोकप्रियता आधी रह गई है और हर नए सर्वे में नीचे ही जा रही है. बांसुरीवादक के पीछे चलने वाली भीड़ छंट सी गई है. 

यू ट्यूब के भाषणों को मैंने फिर से देखा और बात कुछ हद तक समझ में आई.

ओबामा ने जो कहानियां सुनानी शुरू की थीं, दुनिया ने बरसों से वो कहानियां नहीं सुनी थीं. लेकिन व्हाइट हाउस में घुसने के बाद वो कहानियां उन्होंने अधूरी छोड़ दी हैं. बॉलीवुड की फ़िल्मों की तरह पुरानी कहानियां ही फिर से रीसाईकिल होने लगीं.

ओबामा ने बंदूक़ ख़त्म करने की बात की थी, आज हर दूसरे दिन कोई सनकी स्कूली बच्चों को बंदूक़ का निशाना बना रहा होता है.

वॉल स्ट्रीट के जिन गुंडों को ख़त्म करने की बात कही थी उन्होंने, वही आज फिर से दुनिया से हफ़्ता वसूली कर रहे हैं.

अमीरी-ग़रीबी की खाई पहले से ज़्यादा बड़ी हो गई है. जिस दुनिया को उन्होंने अमरीकन ड्रीम में हिस्सा देने का वादा किया था, वो दुनिया आज भी अमरीकी आप्रवासन नियमों के दीवार से सिर टकरा कर ज़ख़्मी हो रही है.

नायकों और महानायकों की कहानियां ज़रूरी होती हैं क्योंकि वो नींव बनती हैं आने वाले कल की. और ज़रूरी होता है कि वो कहानियां पूरी की जाएं.

शायद  अपनी कहानी अभी  तक पूरी नहीं कह  पाने की झुंझलाहट है उनके  चेहरे पर. शायद बंटे हुए अमरीका को एक नहीं कर पाने की हताशा है उनके भाषणों में ". 

राजमहल में शनि के निवास की कथा अक्टूबर 2014 में समाप्त होने वाली है . अस्त हुए सूर्य वापस उदय होंगे . पुराने राजा फिर वापस आयेंगे और नयी शनि कथा के लिए 2037  तक इन्तजार करना होगा .

 अच्छा है कि भारत के आम चुनाव इसके पहले ही हैं  और बुरा यह है कि  चाहे जो भी राजा चुना जाए , वह पुराने राजा जैसा ही होगा क्योंकि अक्टूबर 2014 के बाद  पुराने  सूर्य टाइप के ही राजा का योग है !       

Go Back

Comment