Menu

Use Behavioural Astrology

Astrological Review of Bihar Politics

June 17, 2013

बिहार की चुनावी राजनीति का ज्योतिषीय विवेचन 

 

सन 2004 से 2012 तक मेरी पोस्टिंग पावरग्रिड में बिहार राज्य में ही थी .मुझे इस दौरान बिहार राज्य और इसके निवासियों को नज़दीक से जानने का मौक़ा मिला . मेरे प्रवास में पहला साल लालू राज , दूसरा साल कांग्रेस का राज्यपाल(बूटासिंह) शासन और उसके बाद से नीतीश कुमार का शासन था .

बिहार में सरकारी कार्यों की गति विभिन्न कारणों से धीमी रहने के कारण मुझे ज्योतिष के बहुत सारे प्रयोग करने का समय मिल सका .वैसे तो मुझे दरभंगा में लोग पावरग्रिड प्रोजेक्ट इंचार्ज के रूप में ही जानते थे लेकिन कुछ लोग ज्योतिष में रूचि रखने के लिए भी मुझे जानते थे.ऐसे मित्रों की फरमाइश पर पहले मैंने बिहार के बारे में ज्योतिषीय भविष्यवाणी करने के लिए एक उचित गणितीय आधार की खोज आरम्भ की .और उसके बाद जब मैंने लालू जी की सरकार जाने की भविष्यवाणी की तो उन दिनों बिहार वासियों को यह यकीन करना मुश्किल था कि लालू जी की सत्ता 15 साल बाद वाकई उखड़ने वाली है.

चुनाव की भविष्यवाणियों के लिए ज्योतिषी ज्यादातर प्रमुख नेताओं की जन्मकुंडलियों को आधार बना कर चलते हैं और ऐसी भविष्यवाणियाँ अक्सर गलत होती हैं क्योंकि असली जन्मतिथि नेता कभी जाहिर नहीं होने देते हैं और अगर पता लग भी जाए तो उस पर बाद में भ्रम फैला कर दो तीन जन्मतिथि प्रचारित कर दी जाती हैं . यही समस्या दलों की कुंडली बनाने में भी अक्सर आती है. अत: इनके आधार पर सही भविष्यवाणी करना बेकार था और मैं एक स्पष्ट आधार की खोज में था .

अंत में मैंने गोचर आधारित भविष्यवाणी पर ध्यान केन्द्रित किया जिसमें राशि को आधार मानकर भविष्यवाणी की जाती है. अब मेरा पहला लक्ष्य लक्षणों के आधार पर बिहार राज्य के लिए एक प्रभाव राशि, बारह राशियों में से चुनना था .

बिहार की प्रमुख भौगोलिक व राजनैतिक विशेषताएं मेरे अनुसार इस प्रकार हैं :

1. अनेक नदियों का हिमालय नेपाल से आके गंगा में मिलना , बिहार को जल प्रचुर व बाढ़ ग्रस्त राज्य बनाता है.
2. आबादी का अधिक घनत्व व अधिक जन्मदर
3. बिहार के निवासी ऊपर से शांत व अन्दर से उद्वेलित रहते हैं .
4. अपने राज्य में भौगोलिक व राजनैतिक कारणों से पिछडापन भोगने को अभिशप्त बिहार निवासियों में असीम ऊर्जा छुपी रहती है जो बिहार से बाहर जाने पर मुखर हो जाती है और इनकी विशेष प्रगति का कारण बनती है. यह भूमि में छिपे पेट्रोलियम या कोयले से मिलता उदाहरण है जो बाहर जाने पर महँगा बिकता है.
5. यह विशेष प्रतिभा बिहार में अधिक अपराध दर व माफिया के फैलाव में भी दिखता है .

उपर्युक्त आधार पर 12 राशियों में से एक राशि का चुनाव मुझे करना था . 12 राशियों में से 3 राशियाँ कर्क, वृश्चिक व मीन ही जलीय राशियाँ हैं जिनमें से मीन को समुद्री राशि माना जाता है . बिहार समुद्र के पास न होने से मेरा चुनाव सिर्फ कर्क व वृश्चिक के बीच रह गया .

कर्क राशि को चौथे भाव सुख, सम्पन्नता की राशि व इसके स्वामी चंद्रमा को शान्ति व सुख का कारक माना जाता है.

इसके विपरीत वृश्चिक राशि आठवीं राशि है जो की भूमिगत ऊर्जा संपन्न ( रहस्यमय) , शोभारहित व गोपनीय मानी जाती है. इस राशि में सुख का ग्रह चन्द्रमा नीच का माना जाता है. इसका स्वामी ग्रह मंगल ऊर्जा , क्रोध , अपराध व सुरक्षा , बल पूर्वक कार्य कराने वाला ग्रह माना जाता है.

अत: निर्विवाद रूप से वृश्चिक राशि को बिहार राज्य की प्रभाव राशि मान सकते हैं . एक बार राशि निर्धारण हो जाने पर इस राशि से गुरु व शनि ग्रहों की स्थिति के अनुसार राज्य व इसकी सत्ता परिवर्तन की भविष्यवाणी भी की जा सकती है.

यहाँ एक रोचक बात मैंने पायी कि चीन की राशि भी वृश्चिक है क्योंकि ऊपर लिखे कई कारण जैसे रहस्यमयता , बाढ़ , भूकंप , बीमारियाँ , गरीबी, बड़ी आबादी, बेरोजगारी व बलपूर्वक शासन (कम्युनिस्ट) चीन के साथ भी लागू होते है. चीन व बिहार में काफी समानताएँ आप भी खोज सकते हैं .

गोचर के आधार पर भविष्यवाणी :

शनि ग्रह सूर्य के चारो ओर 30 साल में एक चक्कर लगाता है और 12 राशियों का भ्रमण पूरा करता है . इस प्रकार यह एक राशि में करीब ढाई साल रहता है . इसके प्रवेश से ठीक पहले अनेकों परिवर्तनों की शुरुआत हो जाती है जो कम से कम ढाई साल या उससे अधिक समय तक प्रभावी रहते हैं .

किसी भी राशि से शनि चौथे व आठवें स्थान पर होने से ढैया यानी ढाई साल उस राशी के लिए उथलपुथल भरे होते हैं .

इसके अलावा राशि से एक पहली राशि से आरम्भ कर राशि से आगे वाली राशि तक शनि का ( पूर्व,मध्य व पश्चात) 3 राशियों का लगातार शनि भ्रमण जन सामान्य में साढ़े साती के नाम से प्रचलित है क्योंकि इसमें साढ़े सात साल लगते हैं . साढ़े साती का समय किसी भी राशि के लिए आमूल चूल परिवर्तन कारक होता है और इस समय से पहले और बाद के समय में ज़मीन आसमान का अंतर होता है.

 

वृश्चिक राशि की ढैय्या व साढ़े साती

उपर्युक्त नियम के आधार पर शनि का कुंभ व मिथुन राशि में भ्रमण ढैय्या और तुला , वृश्चिक व धनु में भ्रमण साढ़े साती का समय वृश्चिक राशि के लिए होगा जो बिहार के लिए भी लागू होगा .

शनि ग्रह की सन 2000 से विभिन्न राशियों में प्रवेश की तिथि इस प्रकार है :

1 . वृष में प्रवेश जून 2000 से

2. मिथुन में प्रवेश अप्रैल 2003 से

3 कर्क में प्रवेश सितम्बर 2004

4. सिंह में प्रवेश नवम्बर 2006

5 कन्या में प्रवेश सितम्बर 2009

6. तुला में प्रवेश नवंबर 2011

7. वृश्चिक में प्रवेश नवम्बर 2014 से

8. धनु में प्रवेश जनवरी 2017 से

9. मकर में प्रवेश जनवरी 2020 से

आप देख सकते हैं कि बिहार की ढैय्या शनि के मिथुन राशि प्रवेश के साथ सन अप्रैल 2003 से सितम्बर 2004 और पुन: 13 जनवरी 2005 से 26 मई 2005 तक थी . यह समय अष्टम शनि का होने से, जिसमें शनि की तीसरी दृष्टि दशम स्थान पर होती है , बिहार के चुनाव में शासक बदलने की गारंटी थी .

बिहार में लालू प्रसाद यादव की सत्ता शनि की मिथुन राशि की ढैय्या के दौरान गयी थी जब शनि वक्री गति से पुन: मिथुन राशि में 13 जनवरी 2005 से 26 मई 2005 तक था . बिहार विधान सभा के चुनाव फरवरी 2005 में कराए गए थे जिसमें लालू को बहुमत नहीं मिला और न ही किसी ने उनका समर्थन किया और लालू को सत्ता छोडनी पड़ी .

मेरी लालू के हटने की सफल भविष्यवाणी का मुख्य आधार सन 2005 के चुनाव के समय शनि का मिथुन राशि में होना था, जो की आठवाँ गोचर होने से सत्ता परिवर्तन की गारंटी देता है.

इसके बाद शनि का गोचर 9 , 10 व 11वें शुभ स्थानों में होने से सत्तारूढ़ दल को निष्कंटक राज्य व अभूतपूर्व बहुमत भी मिला.

लेकिन 15 नवम्बर 2011 से बिहार , शनि के तुला राशि में प्रवेश के साथ ही साढ़े साती के प्रभाव में आ चुका है। साढ़े साती के पहले चरण में जो नवम्बर 2014 तक है , इसमें परिवार में कलह ( सत्तारूढ़ दलों की आपस में कलह ) , जनता व सरकार के बीच झडपें व लोकप्रियता में कमी का फल मिलेगा, लोकसभा चुनाव के बाद इसमें और तेजी आयेगी .

साढ़े साती के दूसरे चरण , जो शनि के वृश्चिक प्रवेश नवम्बर 2014 से जनवरी 2017 तक होगा , इसमें शनि की दशम दृष्टि दशम राज्य स्थान पर पुन: होने से अष्टम शनि ही की तरह यानी फरवरी 2005 की तरह बिहार में पुन: सत्ता परिवर्तन का योग बन रहा है . बिहार विधान सभा के चुनाव सन 2015 के अंत में होने हैं .

बिहार सन 2011 -2019 के बीच साढ़े साती के प्रभाव में है अत: इस अवधि में बिहार में आमूल चूल परिवर्तन दिखने की संभावना है . आप भी इन संभावनाओं के बारे में अनुमान लगा सकते हैं , इसके लिए मैं आपको एक प्रमाण देता हूँ .

शनि 30 साल बाद सूर्य का एक चक्कर पूरा करता है इसलिए 30 बरस बाद पुन: पिछला इतिहास नई पीढ़ी के साथ दुहराया जाता है. बिहार की पिछली साढ़े साती 30 बरस पहले अक्टूबर 1982 से दिसंबर 1990 तक थी , जिसमें कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी की सत्ता जो बिहार से गयी तो वह अभी तक दुबारा किसी भी राष्ट्रीय पार्टी को नहीं मिली है.

साढ़े साती में शनि उलटफेर के लिए जाना जाता है , इसलिए आप भी समझ सकते हैं कि क्षेत्रीय राजनीति से वापस राष्ट्रीय पार्टी  के हाथ में बिहार की सत्ता पहुँचने की अवधि  इसी साढ़े साती में है.

लगे हाथों आपको एक अंतर्राष्ट्रीय उदाहरण दे कर अपनी बात को मैं विराम देता हूँ .

मैंने ऊपर लिखा है कि चीन की भी वृश्चिक राशि है . अत: साढ़े साती के वही प्रभाव चीन पर भी लागू होंगे . चीन अक्टूबर 1982 से दिसंबर 1990 तक एक बड़ी उथलपुथल से गुजरा जिसमें 1989 का तियान्मैन चौक नरसंहार  भी शामिल था और जिसे बड़ी सख्ती से कुचल तो दिया गया लेकिन उसी के कारण चीन में  आर्थिक उदारी व वैश्वीकरण की शुरुआत मानी जाती है. इन परिवर्तनों को स्वीकार करने के कारण ही अगले तीस साल में चीन विश्व की आर्थिक महाशक्ति बन सका .

सन 2011 -2019 के बीच चीन पुन: साढ़े साती की गिरफ्त में है, पर इस बार वह महत्वाकांक्षा की वजह से पतन की ओर है और इसके लक्षण अभी से दिखने लगे हैं : पड़ोसी देशों भारत , जापान , वियतनाम और अमेरिका आदि से कलह की शुरुआत हो चुकी है और 2020 के बाद की चीन की स्थिति में अब से ज़मीन आसमान का अंतर आपको मिलेगा क्योंकि उत्थान के बाद पतन ही होता है .

Go Back

Comments for this post have been disabled.