The Difference Between Shani Mahadasha and Shani Sadesati

Many of my clients from  Seattle, Toronto, Atlanta, Sydney, London, Houston and other places have asked me about the difference between these two astrological phenomena. 

 Shani ( Saturn ) Mahadasha is part of Vinshottari Mahadasha of 120 years where Saturn gets 19 years in a fixed sequence, and it is decided by your birth time Moon Nakshatra . So some people may get it in their life while some may not get it at all . It is like Youth or old age , which one may get or not depending upon the life span a person gets.

On the other hand , Shani Sadesati is based on person’s Moon Sign at the time of birth and every time Saturn comes near to that Moonsign , that period will start for 7.5 years. So, this is a recurring phenomenon of 7.5 years duration in every 30 years cycle.

Out of the two , Sadesati has more drastic effects and it can come maximum 3 to 4 cycles in human life in 3 stages of life i.e. Childhood, Youth and Old age !

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महादशा ( मुख्य स्थिति, कंडीशन) आपके स्वास्थ्य की मुख्य स्थिति जैसी है अर्थात बचपन, जवानी , बुढ़ापा की तरह आप अपनी आयु एक क्रम में ही व्यतीत करेंगे । महादशा जन्म से ही आरम्भ हो जाती है और एजिंग प्रोसेस की तरह 120 साल (विंशोत्तरी में) धीरे धीरे चलती रहती है । 19 साल की शनि महादशा को बुढापे की तरह कष्टकारी मान सकते हैं ।

लेकिन सबको जीवन में शनि महादशा मिले यह आवश्यक नहीं है , जिस तरह यह जरूरी नहीं है कि हर व्यक्ति बुढ़ापा भुगत के मरे। महादशा स्वास्थ्य की तरह आपका व्यक्तिगत प्रभाव है लिवर, किडनी , ह्रदय की दशा की तरह । यही बात शनि अंतर्दशा के लिए छोटी अवधि की बीमारी वगैरह की तरह समझ सकते हैं ।

अब आते हैं गोचर प्रभाव पर । यह एक सामूहिक प्रभाव है ग्रह का वर्तमान मौसम की तरह । यह स्वास्थ्य की तरह एक व्यक्ति के लिए नहीं है । यह एक व्यक्ति समूह के लिए प्रभाव है आंधी, तूफान, बाढ़ , भूकंप की तरह । एक राशि समूह के लिए यह प्रभाव समान होगा । मौसम की तरह यह जल्दी जल्दी और सामूहिक रूप से आएगा । शनि साढ़ेसाती शनि का गोचर प्रभाव है जो एक चन्द्र राशि के व्यक्ति समूह को हर 30 साल में , साढ़े सात साल के लिए सबको मिलेगा , चाहे वह किसी भी महादशा में हों ।

इसलिए साढ़ेसाती शनि की महादशा में भी आती है और अन्य ग्रहों की महादशा में भी ।कोई भी महादशा मानव जीवन में रिपीट होना मुश्किल है 120 साल का क्रम होने से , पर साढ़ेसाती हर 30 साल बाद रिपीट होगी साढ़ेसात साल के लिए । इसका अलावा दो बार ढैया भी होतीं हैं हर 30 साल में ढाई साल के लिए । इनका असर साढ़ेसाती के मुकाबले एक तिहाई होता है ।

उदाहरण के लिए एक बच्चा और एक बूढ़ा लें । बच्चे को चन्द्र महादशा में मान सकते हैं जिसका स्वास्थ्य अच्छा है , बूढ़े को शनि महादशा मान सकते हैं खराब स्वास्थ्य के कारण । दोनों अलग अलग स्वास्थ्य स्थिति में हैं । दोनों एक कार में जा रहे हैं और सड़क पर एक बड़ा एक्सीडेंट हो जाता है । यह एक्सीडेंट शनि के गोचर की तरह है जिसका स्वास्थ्य से कोई लेना देना नहीं है , इसमें समान रूप से सभी लोग नुकसान उठा सकते हैं ।बच्चे और वृद्ध दोनों को फ्रैक्चर हो सकता है । बस बच्चे की दशा अच्छी होने से उसकी रिकवरी अच्छी हो जाएगी , वृद्ध को दोहरी मार पड़ेगी (शनि महादशा और शनि गोचर साढ़ेसाती दोनों एक साथ) ।आंकड़ों के हिसाब से , दुनियां में लगभग एक तिहाई लोगों को शनि महादशा और शनि साढ़ेसाती से एक साथ रूबरू होना पड़ता है ।

 

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